सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) से जुड़े मामलों में केंद्र सरकार की गैरजरूरी अपीलों पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा कि सरकार अनावश्यक मुकदमेबाजी कर अदालतों में लंबित मामलों की संख्या बढ़ा रही है, जिससे न्यायिक व्यवस्था पर बोझ बढ़ता है।
एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने CISF के एक कर्मचारी की 11 दिन की गैरहाजिरी पर नौकरी छीनने के फैसले को गलत ठहराया। कोर्ट ने कर्मचारी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार पर जुर्माना भी लगाया। अदालत ने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर कर्मचारियों की नौकरियां छीनना न्यायसंगत नहीं है और सरकार को ऐसी कठोर कार्रवाई से बचना चाहिए।
वहीं दूसरी ओर, देवास में CISF के जवानों ने योग दिवस के मौके पर माता टेकरी पर सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित किया। इस आयोजन में 110 CISF जवानों ने भाग लिया और स्थानीय लोगों को योग के लाभ के प्रति जागरूक किया। जवानों ने बताया कि योग से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होता है, जिससे वे अपने कर्तव्यों का बेहतर निर्वहन कर पाते हैं।
CISF के मामलों में सुप्रीम कोर्ट की यह सख्ती सरकार के लिए एक बड़ा संदेश मानी जा रही है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखते हुए विवेकपूर्ण तरीके से ही अपील करनी चाहिए। अनावश्यक कानूनी लड़ाई न केवल न्यायपालिका का समय बर्बाद करती है, बल्कि पीड़ित कर्मचारियों को भी परेशानी में डालती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख अन्य सरकारी विभागों के लिए भी एक उदाहरण बनेगा। इससे उम्मीद है कि भविष्य में सरकार और सरकारी विभाग अदालतों में अपील करने से पहले गंभीरता से विचार करेंगे, जिससे न्यायिक व्यवस्था पर बोझ कम होगा और कर्मचारियों को भी न्याय मिल सकेगा।
CISF जवानों द्वारा योग कार्यक्रम की सराहना स्थानीय लोगों ने भी की। लोगों का कहना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ती है और सुरक्षा बलों व आम जनता के बीच बेहतर संबंध बनते हैं।
