मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। ईरान ने इज़राइल के तेल अवीव पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। मात्र 40 मिनट के भीतर छह बार सायरन बज उठे, जिससे नागरिकों में दहशत फैल गई।
इस हमले के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और कई अन्य देशों की नजरें इस टकराव पर टिकी हैं। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने साफ कहा कि यह उनका युद्ध नहीं है, और उन्होंने अमेरिका को सख्त संदेश दिया है। इस बयान से यूरोप की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
हमलों की आंच केवल इज़राइल तक ही सीमित नहीं रही। ईरान ने बहरीन में अमेजन के ऑफिस पर भी हमला किया है। साइबर हमलों की आशंका के चलते माइक्रोसॉफ्ट, एपल और गूगल जैसी दिग्गज कंपनियां भी सतर्क हो गई हैं। तकनीकी सेक्टर में भी इस तनाव का असर दिखने लगा है।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से डील को लेकर अपनी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के साथ किए गए समझौतों ने मौजूदा हालात को और जटिल बना दिया है। उनकी टिप्पणी से अमेरिका की विदेश नीति पर बहस तेज हो गई है।
वर्तमान में इज़राइल की सेना पूरी तरह अलर्ट है और जवाबी कार्रवाई की संभावना पर चर्चा जारी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि स्थिति काबू में नहीं आई, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।
दूसरी ओर, आम लोग भय और अनिश्चितता के माहौल में हैं। लगातार सायरन और हमलों की खबरों ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थानीय प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और जरूरत के समय ही बाहर निकलने की अपील की है।
दुनिया भर में इस संघर्ष को लेकर चिंता बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संस्थाएं शांति की अपील कर रही हैं। फिलहाल सभी की निगाहें ईरान-इज़राइल के अगले कदम और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
