मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दाम 112 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी के चलते तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है। इससे न केवल तेल की कीमतों में तेजी आई है, बल्कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा भी मंडरा रहा है।
पिछले कुछ हफ्तों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 60% से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जहां हाल ही में इसका भाव 70 डॉलर प्रति बैरल था, अब यह 112 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया है। निवेश बैंक गोल्डमैन सैश ने भी भविष्यवाणी की है कि यदि हालात सामान्य नहीं हुए, तो कच्चे तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं।
तेल की कीमतों में अचानक आई इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल के दामों में इजाफा होने की संभावना है, जिससे परिवहन, खाद्य वस्तुओं और अन्य आवश्यक चीजों के दाम बढ़ सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और गहराता है, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी बुरा असर पड़ सकता है। भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि ये देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कच्चे तेल के आयात पर निर्भर हैं।
फिलहाल निवेशकों और सरकारों की नजरें मध्य-पूर्व के हालात पर टिकी हुई हैं। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतें और अधिक ऊंचाई छू सकती हैं। ऐसे में आम लोगों और उद्योग जगत के लिए महंगाई का नया संकट खड़ा हो सकता है।
