राहुल गांधी ने लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण विधेयक पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह विधेयक महिलाओं को सशक्त बनाने के बजाय देश की चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश है। राहुल ने इसे "घबराहट में लिया गया कदम" बताया और आरोप लगाया कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि को बेहतर दिखाने की कोशिश हो रही है।
उन्होंने संसद में जोर देकर कहा कि भारत ने सब देख लिया है, लेकिन INDIA गठबंधन ने सरकार के इस कदम को रोक दिया। राहुल गांधी के मुताबिक, सरकार का यह प्रयास सिर्फ दिखावा है और असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए लाया गया है। उन्होंने सवाल किया कि आखिर महिलाओं को वास्तविक अधिकार कब मिलेंगे, और क्या सरकार की योजना इन अधिकारों को टालने की है।
इसी बीच, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। उन पर ब्रिटिश नागरिकता रखने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने मामले की जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए हैं। इस फैसले के बाद कांग्रेस पार्टी ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताया और कहा कि राहुल गांधी को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है।
राहुल गांधी के बयान और उन पर लगे आरोपों के चलते देशभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया पर भी राहुल गांधी के पक्ष और विपक्ष में बहस जारी है।
महिला आरक्षण बिल और नागरिकता विवाद के चलते राहुल गांधी एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। विपक्षी दलों ने सरकार से पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, भाजपा नेताओं का कहना है कि कानून अपना काम करेगा और दोषी को सजा जरूर मिलेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद संसद और देश की सियासत में गर्माहट बढ़ गई है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बहस होने की संभावना है। जनता और राजनीतिक विश्लेषक दोनों राहुल गांधी के अगले कदम पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
