स्विट्जरलैंड के दिग्गज टेनिस खिलाड़ी स्टान वावरिंका एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में उनके कोच मैगनस ने कहा है कि वावरिंका को टेनिस जगत में वो सम्मान और अहमियत नहीं मिली, जिसके वे हकदार हैं। वावरिंका ने अपने करियर में कई बड़े टूर्नामेंट जीते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें महान खिलाड़ियों की सूची में कम आंका जाता है।
वावरिंका ने तीन ग्रैंड स्लैम खिताब अपने नाम किए हैं। उन्होंने 2014 में ऑस्ट्रेलियन ओपन, 2015 में फ्रेंच ओपन और 2016 में यूएस ओपन का ताज पहना था। इन उपलब्धियों के बावजूद, टेनिस प्रेमियों और विशेषज्ञों का ध्यान अक्सर रोजर फेडरर, राफेल नडाल और नोवाक जोकोविक जैसे नामों पर ही केंद्रित रहता है।
कोच मैगनस का मानना है कि वावरिंका की मेहनत और खेल के प्रति समर्पण काबिले-तारीफ है। उन्होंने कहा कि वावरिंका ने सबसे कठिन दौर में खुद को साबित किया है और कई बार नंबर वन खिलाड़ियों को भी मात दी है। उनकी ग्राउंडस्टोक्स, सर्व और मानसिक मजबूती ने उन्हें टेनिस कोर्ट पर खास बना दिया है।
हाल ही में ऑस्ट्रेलियन ओपन 2026 को लेकर भी चर्चा हो रही है, जहां नोवाक जोकोविक ने रिकॉर्ड शतक लगाकर इतिहास रच दिया। ऐसे में फेडरर और जोकोविक जैसे दिग्गजों के बीच वावरिंका की उपलब्धियां कहीं दब सी जाती हैं। वहीं, टोक्यो ओलंपिक्स 2020 में फेडरर के चयन की खबरें भी सुर्खियों में रही थीं, लेकिन वावरिंका का नाम उतना उभरकर सामने नहीं आता।
टेनिस विशेषज्ञ मानते हैं कि वावरिंका का करियर प्रेरणादायक है। उन्होंने चोटों और निराशा के दौर को पार कर फिर से टॉप स्तर पर वापसी की है। वे आज भी युवा खिलाड़ियों के लिए एक आदर्श माने जाते हैं। वावरिंका के खेल में जो जुनून और धैर्य दिखता है, वही उन्हें भीड़ से अलग बनाता है।
समर्थकों का कहना है कि वावरिंका की उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर अधिक सराहना मिलनी चाहिए। वे न सिर्फ स्विट्जरलैंड, बल्कि पूरी दुनिया के टेनिस प्रेमियों के लिए प्रेरणा हैं। अब देखना यह है कि आने वाले टूर्नामेंट्स में वावरिंका अपनी पहचान को और मजबूत कर पाते हैं या नहीं।
आखिरकार, टेनिस के इस साइलेंट वॉरियर का संघर्ष और सफलता एक मिसाल है, जिसे भूलना आसान नहीं होगा।
