मध्य पूर्व में इन दिनों तुर्की एक बार फिर सुर्खियों में है। इजरायल के लिए तुर्की अब ईरान की तरह बड़ा खतरा बनता दिख रहा है। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन के पाकिस्तान के साथ बढ़ते रिश्तों और 'सुन्नी गठबंधन' की चर्चा ने इजरायल की नींद उड़ा दी है।
पिछले कुछ दिनों में तुर्की ने दक्षिण कोरिया और इजरायल के खिलाफ कई सख्त बयान दिए हैं। इससे दोनों देशों के साथ तुर्की के संबंधों में और तनाव आ गया है। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि तुर्की की विदेश नीति में हालिया आक्रामकता का असर पूरे क्षेत्र पर पड़ सकता है।
एक और घटना ने सबका ध्यान खींचा, जब युगांडा के सेना प्रमुख ने तुर्की से 1 अरब डॉलर और सुंदर दुल्हन की अजीबोगरीब मांग कर दी। यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और दोनों देशों के संबंधों में नया रंग भर गया। हालांकि, इस बयान को लेकर तुर्की की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तुर्की अपनी क्षेत्रीय शक्ति को बढ़ाने के लिए लगातार नए-नए गठजोड़ कर रहा है। पाकिस्तान और अन्य सुन्नी देशों के साथ तुर्की की बढ़ती नजदीकियां इजरायल के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। कई जानकारों का कहना है कि तुर्की अब मिडिल ईस्ट की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाने की तैयारी में है।
इसी बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के लिए यह नई चुनौती बनकर उभरी है। नेतन्याहू सरकार तुर्की की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही है और इसे ईरान के बाद सबसे बड़ा रणनीतिक खतरा मान रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ सकती है।
तुर्की की आक्रामक कूटनीति और इजरायल के साथ तल्ख रिश्ते आने वाले समय में मध्य पूर्व की राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा और शक्ति संतुलन पर इन घटनाओं का असर देखना दिलचस्प होगा। तुर्की की अगली रणनीति और इजरायल की प्रतिक्रिया पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
