इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है, जिस पर इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। मेलोनी ने अमेरिका और इजरायल को खुलकर संबोधित किया, जिससे इटली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
प्रधानमंत्री मेलोनी ने अपनी बयानबाजी में ईरान युद्ध के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इटली किसी भी प्रकार के सैन्य संघर्ष का समर्थन नहीं करता। उनके इस 'NO' बयान के बाद इटली के कई शहरों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, जिसमें हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
प्रदर्शनकारियों ने बस और रेलवे स्टेशनों पर जमकर तोड़फोड़ की। लोग सरकार की नीतियों और अंतरराष्ट्रीय मामलों में इटली की भूमिका को लेकर असंतुष्ट दिखाई दिए। मेलोनी की प्रतिक्रिया ने इटली में राजनीतिक गर्माहट को और बढ़ा दिया है।
अमेरिका और इजरायल के साथ मेलोनी के रिश्ते हमेशा चर्चा का विषय रहे हैं। लेकिन इस बार उनका स्पष्ट विरोध दर्शाता है कि इटली सरकार मौजूदा संघर्ष में अपनी तटस्थता बनाए रखना चाहती है। इस फैसले से यूरोप में भी राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेलोनी के इस बयान से इटली की जनता के बीच सरकार की छवि प्रभावित हो सकती है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इटली की भूमिका को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। अमेरिका और इजरायल के साथ मेलोनी के रिश्ते अब पहले जैसे नहीं रहे।
ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच इटली की प्रधानमंत्री का यह बयान यूरोपीय राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार जनता की भावनाओं का सम्मान करे और अंतरराष्ट्रीय विवादों में इटली को दूर रखे। फिलहाल, मेलोनी के बयान और जनता की प्रतिक्रिया के बीच इटली में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
सरकार की ओर से अब तक कोई नई नीति घोषित नहीं हुई है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। आने वाले दिनों में इटली की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर नजर रखना जरूरी होगा।
