भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की महत्वपूर्ण बैठक आज से शुरू हो गई है। इस बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे न केवल देश की अर्थव्यवस्था बल्कि आम लोगों की जेब पर भी सीधा असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक हालात, खासकर पश्चिम एशिया में जारी संकट, भारतीय बाजारों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में, रेपो रेट को लेकर होने वाला फैसला बेहद अहम माना जा रहा है। रेपो रेट में बदलाव होने पर आपकी लोन की ईएमआई भी कम या ज्यादा हो सकती है, जिससे लाखों लोगों के बजट पर असर पड़ेगा।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में तीन बड़े फैसलों की उम्मीद जताई जा रही है, जिन्हें 'संकटमोचक' भी कहा जा रहा है। पहला, रेपो रेट में बदलाव की संभावना है, जो बैंकों की ब्याज दरों को प्रभावित करेगा। दूसरा, विदेशी मुद्रा विनिमय दरों को स्थिर रखने के लिए जरूरी कदमों पर चर्चा हो सकती है। तीसरा, महंगाई को काबू में रखने के लिए कुछ सख्त उपायों की घोषणा संभव है।
आरबीआई की पिछली बैठकों में रेपो रेट को स्थिर रखा गया था, लेकिन इस बार बाजार में अस्थिरता और महंगाई के दबाव को देखते हुए किसी बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर रेपो रेट घटाया जाता है तो इससे होम लोन, ऑटो लोन और अन्य ऋणों की ईएमआई कम हो सकती है, जिससे आम आदमी को राहत मिलेगी। वहीं, अगर दरें बढ़ती हैं तो लोन महंगे हो सकते हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि इस बैठक के नतीजे भारत की अर्थव्यवस्था के लिए निर्णायक हो सकते हैं। अगर आरबीआई ने संतुलित फैसला लिया तो भारत अपने 'गौरवशाली इतिहास' को दोहराने की ओर बढ़ सकता है। वहीं, विदेशी निवेशक भी इस फैसले पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि इससे बाजार की दिशा तय होगी।
मौद्रिक नीति समिति की यह बैठक तीन दिनों तक चलेगी और बुधवार को इसके फैसलों की औपचारिक घोषणा की जाएगी। आम जनता, निवेशक और बैंकिंग सेक्टर के लिए यह फैसले काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
